News Image

शब-ए-बारात के बाद शुरू होगा रमजान का पाक महीना, इबादत और संयम का दौर

 

इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात को बेहद अहम माना जाता है। इसे रहमत, मग़फ़िरत और तक़दीर की रात कहा जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार शाबान महीने की 15वीं रात को शब-ए-बारात मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पाक रात 3 फरवरी को मनाई गई। इस अवसर पर मुसलमान पूरी रात इबादत में गुजारते हैं, नमाज़ अदा करते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और अपने गुनाहों की माफी के लिए अल्लाह से दुआ मांगते हैं। मान्यता है कि इस रात इंसानों की तक़दीर लिखी जाती है और मृतकों की आत्माओं के लिए भी दुआ की जाती है।

शब-ए-बारात के बाद रमजान की तैयारी

शब-ए-बारात के बाद इस्लाम का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक दौर शुरू होने वाला होता है, जो रमजान के पाक महीने से जुड़ा है। शब-ए-बारात के लगभग 15 दिन बाद रमजान की शुरुआत होती है। इसी कारण इस रात के बाद से ही मुसलमान रमजान की तैयारियों में जुट जाते हैं। घरों में साफ-सफाई, इबादत का विशेष इंतजाम और रोज़ों की मानसिक व शारीरिक तैयारी शुरू हो जाती है।

रमजान: इस्लाम का सबसे पवित्र महीना

रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है और इसे सबसे पवित्र माना जाता है। साल 2026 में रमजान की शुरुआत 18 या 19 फरवरी से हो सकती है। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा चांद नजर आने के बाद ही की जाती है। रमजान के दौरान मुसलमान पूरे 30 दिन रोजा रखते हैं। रोजा सूर्योदय से पहले सहरी करने के साथ शुरू होता है और सूर्यास्त के बाद इफ्तार के साथ खोला जाता है। यह महीना सब्र, संयम, त्याग और आत्मसंयम का प्रतीक है।

इबादत, कुरआन और ज़कात पर विशेष जोर

रमजान में नमाज़, कुरआन शरीफ की तिलावत, दुआ और ज़कात पर विशेष जोर दिया जाता है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार 610 ईस्वी में इसी महीने पैगंबर मुहम्मद साहब पर फरिश्ते जिब्राइल के माध्यम से कुरआन शरीफ नाज़िल हुआ था। इसी वजह से रमजान का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। मुसलमान इस महीने में ज्यादा से ज्यादा नेक काम करने और जरूरतमंदों की मदद करने की कोशिश करते हैं।

रमजान के बाद ईद-उल-फ़ितर का त्योहार

रमजान का महीना पूरा होने के बाद ईद-उल-फ़ितर मनाई जाती है, जो मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। वर्ष 2026 में ईद-उल-फ़ितर 19 या 20 मार्च को हो सकती है। यह त्योहार रमजान की समाप्ति की खुशी, भाईचारे और आपसी प्रेम का प्रतीक है। इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं, ईद की नमाज़ अदा करते हैं, एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं और गरीबों को फितरा व ज़कात देकर उनकी मदद करते हैं।